Ads By Google info

ताजा खबरें
Loading...
विज्ञापन
Ads By Google info

अनमोल विचार

Subscribe Email

ताजा लेख आपके ईमेल पर



पसंदीदा लेख

आइये जाने की क्या हैं भारत में वर्षा/बारिश के ज्योतिषीय योग वर्ष 2015 में

print this page
आप सभी जानते हैं की सामान्यतया ज्योतिषी बंधू सूर्य के आद्रा नक्षत्र के बीच पारगमन को केंद्र में रखते हुए ही मानसून तथा बारिश के बारे में भविष्यवाणी करते हैं। किंतु, इस समय कि आद्रा प्रवेश कुंडली भारतीय मानसून के संदर्भ में स्पष्ट एवं ठोस संकेत नहीं दे रही है। 
 जानिए की क्या है नवतपा ??? 
 ज्योतिषी पंडित "विशाल' दयानंद शास्त्री के अनुसार नवतपा को ज्येष्ठ महीने के ग्रीष्म ऋतु में तपन की अधिकता का ध्योतक माना जाता है। शुक्ल पक्ष में आर्द्रा नक्षत्र से लेकर 9 नक्षत्रों में 9 दिनों तक नवतपा रहता है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष, बुधवार के दिन ही आर्द्रा नक्षत्र शुरू हो रहा है। जरूरी नहीं कि नवतपा में अधिक गर्मी पड़े। आर्द्रा के 10 नक्षत्रों तक जिस नक्षत्र में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है, आगे चलकर उस नक्षत्र में 15 दिनों तक सूर्य रहते हैं और अच्छी वर्षा होती है। 
 कब होगा आरंभ :--- 
 ज्योतिषी पंडित "विशाल' दयानंद शास्त्री के अनुसारर जब से रोहिणी नक्षत्र शुरू होगा तब से नवतपा भी शुरू हो जाएगा।नवतपा में तेज हवा के साथ बवंडर और वर्षा का अंदेशा है। नवतपा समय की ग्रह स्थिति तेज हवा, बवंडर और वर्षा का संकेत दे रहा है। इस बार नवतपा का प्रारंभ 25 मई, सोमवार से हो रहा है जो 2 जून, शनिवार को समाप्त होगा। 
          ज्योतिषी पंडित "विशाल' दयानंद शास्त्री के अनुसार गुरु कृतिका नक्षत्र में है। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। सूर्य के साथ गुरु का होना तथा शुक्र का भी अपनी ही राशि वृष में आना मौसम परिवर्तन का योग बनाएगा लेकिन मंगल की राहु पर दृष्टि होने से देश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा। ग्रहों और नक्षत्रों के प्रभाव से 25 मई से नवतपा प्रारंभ हो रहा है। नवतपा के दिनों में शादी-विवाह जैसे मांगलिक यात्रा में विशेष सावधानी रखना चाहिए। ग्रहों की स्थिति को देखते हुए देश के पूर्व, पश्चिम व दक्षिण में प्राकृतिक आपदा का योग बन रहे हैं।इस समय आरम्भ हुआ यह नौतपा गर्मी काप्रकोप बढ़ाएगा..यह नौतपा आगामी 02 जून,2015 तक चलेगा ...
 इस समय ज्येष्ठ मास में पांच मंगलवार का योग बन रहा हैं चूँकि मंगल अग्निकारक गृह हैं और इस समय यह सूर्यदेव के साथ मिलकर गर्मी के प्रकोप को और अधिक प्रचँड करेगा..वैसे भी इस वर्ष ज्येष्ठ माह की शुरुआत 05 मई को मंगलवार के दिन हुई हैं ओर समापन भी मंगलवार को 02 जुन को ही होगा..चूँकि नोटपा के दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में वास करता हैं..
      इसके प्रभाव स्वरूप सूर्य की सीधी किरणे पृथ्वी पर गिरती हैंइस दौरान गर्मी के काफी तीखे तेवर देखने को मिल सकते हैं.. ज्योतिषी पंडित "विशाल' दयानंद शास्त्री अनुसार वर्तमान में राहु व केतु के कारण कालसर्प योग बन रहा है वहीं वृषभ राशि में पांच ग्रह- सूर्य, शुक्र, बुध, गुरु व केतु के होने से पंचग्रही योग बन रहा है। साथ ही इस समय सूर्य व केतु एक ही राशि में स्थित हैं तथा उन पर राहु की दृष्टि पड़ रही है जिसके कारण ग्रहण योग बन रहा है। 
           देश-दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला ग्रह शनि भी वर्तमान में वक्री स्थिति में है तथा मंगल के साथ राहु को देख रहा है। राहु की अपनी नीच राशि में होने से तथा उस पर शनि, मंगल की दृष्टि होने से देश-दुनिया में कोई गंभीर हादसा हो सकता है। ज्यो
         तिषी पंडित "विशाल' दयानंद शास्त्री के अनुसार इस स्थिति का असर या होगा की सूर्य के नक्षत्र में सूर्य के साथ गुरु का होना अशुभ फल प्रदान करेगा । वर्तमान में वृष राशि के लिए खराब समय है। चूंकि वृष राशि भारत की भी है इसलिए सरकारी तंत्र के खिलाफ जनता के मन में गुस्सा रहेगा। 29 मई से अस्त गुरु भी उदय हो जाएगा और अपना असर दिखाना शुरू कर देगा। पृथ्वी तत्व की राशि में गुरु के उदय होने से पत्थरों से बनी वस्तुओं में तेजी आएगी। ग्रहों के प्रभाव से तिलहन, धान्य और रत्नों में तेजी आएगी। सिंह का मंगल नीच राशि के राहु को देख रहा है। मंगल और राहु अंगारक योग बना रहें हैं। मंगल व राहु मिलकर कोई बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। 
 ============================ 
अब वर्षा योग पर विचार(कुछ विशेष तथ्य)----
      ज्योतिषी पंडित "विशाल' दयानंद शास्त्री के अनुसार आगामी 14 जुलाई,2015 (मंगलवार) को गृहस्पतिका सिंह राशि में प्रवेश स्वतंत्र भारत की कुंडली के अनुसार चौथे भाव (सुख भाव) में होगावहि सप्तमभाव में वृश्चिक राशि में 02 अगस्त,2015 को शनि देव मार्गी होंगे..इसके प्रभाव स्वरूप प्राकृतिक रूप सेभरपुर बारिश होगी और किसानो तथा व्यापारी वर्ग को फसलों का बंपर उत्पादन लाभदायक रहेगा..इसके फलस्वरूप डालें-अनाज सस्ता होनेकी संभावना बनाती हैं.. इस अवधि में कही कहीं अतिवृष्टि (भारी बारिश) से जान -मॉल के नुकसान की भी संभावना बन रही हैं.. 
 ---इसी समय इन सभी ग्रहीय प्रभावों के कारण भारत विश्व में अपनी प्रमुखता दर्शाते हुए आगे बढ़ता रहेगा..धीरे धीरे विश्व गुरु बनाने की और अग्रसर होता रहेगा... 
--इसी दौरान गुरु-शुक्र का एक साथ आना ( 22 अगस्त से 14 सितम्बर,2015 के बीच) अतिवृष्टि का योग भी बना रहा हैं..सावधान और सतर्करहें..
 --इसी दौरान 16 जुलाई,2015 (गुरुवार) की अर्धरात्रि के पश्चात बनाने वाला गुरु अमृत पुष्य योग उत्तम वर्षा योग बना रहा हैं...इसी के प्रभाव स्वरूप पेट्रोल के दामों में वृद्धि संभावित हैं...इस्समय केंद्र की राजनीतिमें भीकुछ विशेष हलचलहो सकतीहें.. 
---इस समय सिंह राशि का गुरु, श्रवण नक्षत्र का अस्त शुक्र समय पूर्व मानसून/ बारिश की संभावना बना रहा हैं..इस वर्ष लगभग 25 जून,2015 के पूर्व ही मानसून सम्पूर्ण भारतकर्ष में प्रभावी हो जाएगा.. इस वर्ष मानसून/ बारिश उत्तम एवं श्रेष्ठ रहेगा..जनता खुश रहेगी..इस दिन रात्रि के 09 बजे के लगभग शुक्र द्वारा कर्क राशि में परिभ्रमण मघा नक्षत्र में होगा..यह गुरु शुक्र का योग वर्ष का करक बनेगा... 
====================================== 
इस वर्ष मानसून/ बारिश के दौरे(सक्रियता)--- 
ज्योतिषी पंडित "विशाल' दयानंद शास्त्री के अनुसार प्रथम प्रभावी दौरा--- 
---30 मई,2015 से 08 जून,2015 के बीच दक्षिण भारत में मानसून सक्रीय रहेगा..... 
---09 जून,2015 से 15 जुन,2015 के बीच मध्य भारत में मानसून सक्रीय रहेगा.....
 ---17 जून,2015 से 22 जुन,2015 के मध्य उत्तर भारत में मानसून सक्रीय रहेगा..... 
 --22 जुन,2015 से 03 जुलाई,2015 के मध्य पश्चिमी मानसून सक्रीय रहेगा..... 
           इस वर्ष 2015 के मर्इ महीने के अंत में वातावरण में असामान्य एवं अप्रत्याशित मामूली बदलाव की संभावना देखते हैं। यह बदलाव कुछ सामान्य से अलग हो सकता है, किंतु मानसून तथा मौसम को तय करेगा। दूसरे शब्दों में मर्इ महीने के अंत तक यदि वातावरण तथा प्रकृति सामान्य स्थिति में रहते हैं, तो हम उम्मीद कर सकते हैं कि भारत में इस वर्ष मानसून सामान्य रहेगा। यदि मौसम में असामान्य परिस्थितियां देखने को मिलती हैं तो असामान्य मानसून पैटर्न से इंकार नहीं किया जा सकता। 
         भारतीय मौसम के संदर्भ में जून का महीना काफी मुश्किल भरा रहने वाला है। इस वर्ष भारत के कुछ राज्यों या स्थानों पर समय से पहले मानसून दस्तक दे सकता है। दक्षिण भारत के साथ साथ भारत के अन्य हिस्सों में भी मानसून की हलचल देखने को मिलेगी क्योंकि उस समय गुरू एवं शनि अजीब परिस्थितियों में पारगमन करेंगे। सूर्य एवं मंगल की युति बहुत तेज गर्मी तथा उच्च स्तरीय नमी का संकेत दे रही है। इस वर्ष जून एवं जुलार्इ 2015 के दौरान तेज हवाआें एवं आंधियों में हलकी बारिश या बूंदाबांदी से मौसम में सुधार की उम्मीद कर सकते हैं। 
            इस समय एक अन्य ग्रहीय समीकरण भी दृष्टि गोचर गोहा की अशुभ ग्रह राहु एवं केतु क्रमशः भूमि एवं जल तत्व की राशि के बीच से भ्रमण करेंगे । आने वाले कुछ महीनों में दोनों ग्रह सूर्य एवं मंगल की केंद्रीय दृष्टि प्रभाव अधीन होंगे, जो कि बहुत अशुभ संकेत है। इस ग्रहीय गतिविधि के के कारण मध्य जून से लेकर मध्य जुलार्इ तक वातावरण में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्राकृतिक अशुभ ग्रह शनि आने वाले समय में अनुराधा नक्षत्र के बीच से गुजरेगा, जो जलतत्व राशि वृश्चिक में असंतुलन का कारण बनेगा। इस परिदृश्य में हम कह सकते हैं कि भारत के कुछ भागों में न मानसून होगा एवं न बारिश होगी। 
         कुल मिलाकर वर्ष 2015 में मानसून सामान्य रहेगा, हालांकि, भारत के अलग अलग हिस्सों में बारिश का स्तर कम ज्यादा रह सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो भारत के कुछ हिस्सों में बाढ़ सी स्थिति बन सकती है एवं कुछ हिस्सों में बारिश बहुत कम स्तर की होगी। बारिश कब और कितनी होगी, यह बता पाना किसी के लिए संभव नहीं है। बरसात को लेकर कई प्रकार के पूर्वानुमान अवश्य लगाए जा सकते हैं जो कि कई बार सत्य साबित हो जाते हैं। ऐसे ही पूर्वानुमान आप भी लगा सकते हैं। बारिश का पूर्वानुमान लगाने के लिए आपको हवा के बहाव पर ध्यान देना होगा। 
         ध्यानपूर्वक महसूस करें कि हवा किस ओर बह रही है? इसके लिए आपको वास्तु का दिशा ज्ञान चार्ट बनाना होगा। इस चार्ट में आठ दिशाएं दर्शाई रहती हैं। इस चार्ट के अनुसार हवा की दिशा से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आपके क्षेत्र में बारिश कैसी होगी? वास्तु का दिशा ज्ञान चार्ट बनाने के लिए चारों दिशाओं उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के अतिरिक्त वायव्य (उत्तर-पश्चिम), ईशान (उत्तर-पूर्व), आग्रेय (दक्षिण-पूर्व) और नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) दिशाएं रहती हैं। 15 जुलाई के दिन यदि हवा का रुख पूर्व दिशा की ओर हो तो आपके क्षेत्र में उत्तम वर्षा के योग है। 
            यदि हवा आग्नेय कोण की ओर बह रही है तो समझ लें कि आपके यहां कम वर्षा होगी। दक्षिण दिशा में हो तो अल्प वर्षा होगी। नैऋत्य दिशा में हवा बह रही है तो समझ लें कि अनावृष्टि होगी। पश्चिम में हवा का बह रही हो तो महावृष्टि होने के योग बनेंगे। वायव्य दिशा में हवा का बहना इशारा करता है कि आपके क्षेत्र में तेज हवा का दौर चलेगा। उत्तर दिशा की ओर हवा बहती है तो समझ लें कि आपके यहां अतिवृष्टि होगी। ईशान में हवा का बहना बताता है कि आपके क्षेत्र में उत्तम वर्षा होगी। 
         मौसम की भविष्यवाणी करने वाली एक निजी एजेंसी स्काईनेट के अनुसार इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य रहने के आसार हैं. उत्तर भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती हैं जबकि इस बार दक्षिण भारत में कम बारिश की आशंका जाताई जारही है. इस वर्ष 2015 के मानसून द्वारा 27 मई को ही दस्तक देने के आसार हैं. मानसून की आमद सामान्य दिनों से चार दिन पहले होगी. इस वर्ष अलनीनो का असर इस बार मानसून पर पड़ने के आसार हैं. 
         इससे गर्मियों में मानसून कमजोर पड़ेगा. तमिलनाडु, रायलसीमा, दक्षिण कर्नाटक, पूर्वी मध्यप्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में मानसून कमजोर होगा जबकि पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी तट तक अच्छी बारिश के आसार हैं. जून से सितंबर के बीच यहां मानसूनी बारिश औसत 887 मिमी का 102 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी है.अलनीनो के गर्मियों के महीने तक जारी रहने की संभावना है और उसके बाद इसमें कमी आएगी. उन्होंने कहा कि बेमौसम की बारिश मई में भी जारी रहेगी. पिछले साल उत्तर भारत में कई स्थानों पर कम बारिश हुई थी.
Edited by: Editor

आपके विचार

हिंदी में यहाँ लिखे
Ads By Google info

वास्तु

हस्त रेखा

ज्योतिष

फिटनेस मंत्र

चालीसा / स्त्रोत

तंत्र मंत्र

निदान


ऐसा भी होता है?

धार्मिक स्थल

 
Editor In Chief : Dr. Umesh Sharma
Copyright © Asha News . For reprint rights: ASHA Group
My Ping in TotalPing.com www.hamarivani.com रफ़्तार www.blogvarta.com BlogSetu