Ads By Google info

ताजा खबरें
Loading...
विज्ञापन
Ads By Google info

अनमोल विचार

Subscribe Email

ताजा लेख आपके ईमेल पर



पसंदीदा लेख

गुण-मिलान ही काफी नहीं सफल विवाह के लिये

print this page
     विवाह मानव जीवन का एक पड़ाव है जिसके बाद इंसान अपनी पूर्व की जीवन शैली को छोड़कर एक नये जीवन के सफर पर चलता है। हर स्त्री पुरुष विवाह के समय अपना जीवन एक अन्जान व्यक्ति के साथ सिर्फ यह सोचकर जोड़ता है कि मेरा हम सफर जीवन में सदैव मेरा साथ निभायेगा। मेरे हर सुख-दुख को अपना सुख-दुख समझेगा और जिन्दगी में आने वाली सभी कठिनाइयों का मिलकर मुकाबला करेगा। विवाह को पड़ाव इसलिए कहा गया है क्योंकि विवाह से पूर्व व्यक्ति सिर्फ अपने लिये सोचता है, स्वयं के लिये जीता है किन्तु विवाह के पश्चात वह अपने परिवार के लिये अपनी आने वाली संतानों के लिये जीता है। पर आज विवाह का मतलब ही बदल गया है। रोज हम हमारे समाज में कई मामलों में देखतें हैं कि व्यक्ति ग्रस्त वैवाहिक जीवन के फलस्वरूप हत्या और आत्महत्या जैसा अपराध भी कर देते हैं।

गुण-मिलान ही काफी नहीं सफल विवाह के लिये             तलाक, अलगाव, दूसरा विवाह, झगड़ा आये दिन हम देखते हैं। तमाम ऐसी परिस्थितियों के लिये जिम्मेदार हैं हमारी आधुनिक शैली जो समाज को पथभ्रष्ट करती है। टीवी संस्कृति ऐसे धारावाहिक जिनका कोई अर्थ नहीं है, जिनकी तरफ इंसान खिचता चला जा रहा है और आधे से ज्यादा समय वही टीवी देखने में ही गुजारता है। इसका पूरा प्रभाव हमारे समाज, संस्कृति, बच्चों आदि पर पड़ता है। धारावाहिकों की उल्टी-सीधी कहानियों का कोई तत्व नहीं होता पर व्यक्ति अपनी रीयल जिन्दगी में इसको उतार लेता है।
           हमारे देश में 80 प्रतिशत शादियां सिर्फ गुण-मिलान के आधार पर कर दी जाती हैं जो कि किसी भी गली-मुहल्ले में किसी मंदिर में बैठे पूजारी से मिलवा लिये जाते हैं, क्योंकि प्राय: सभी मंदिरों में पूजारी के पास पंचांग होता है और सभी पंचांगों में गुण-मिलान की सारणी होती है, मात्र वो सारणी देखकर जो कि एक आम आदमी भी देख सकता है, पूजारी जी कह देते हैं कि लड़के-लड़की के 28 गुण मिल रहे हैं कोई दोष नहीं हैं आप विवाह कर सकते हैं और मात्र इतने से गुण मिलान मानकर किसी के भाग्य का निर्णय हो जाता है और विवाह हो जाता है। बाद में परिणाम चाहे जो हों यहां मैं यह कहना चाहुंगा कि मेरे उक्त कथन का तात्पर्य यह कतई नहीं हैं कि मैं गुण-मिलान को आवश्यक नहीं मानता या गुण-मिलान का कोई औचित्य नहीं है, बल्कि मेरा भी यह कहना है कि एक सफल विवाह के लिये गुण मिलना भी अत्यन्त आवश्यक हैं किन्तु इसके साथ यह भी कहना है कि सिर्फ गुण-मिलान ही काफी नहीं है बल्कि पूर्ण कुंडली मिलान उससे भी ज्यादा आवश्यक है। 
          यहां मैं पाठकों का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहुंगा कि प्राय: एक दिन या चौबीस घंटों में एक ही नक्षत्र होता है। मात्र एक यो दो घंटे ही चौबीस घंटों में दूसरा नक्षत्र होता है और गुण-मिलान सिर्फ किस नक्षत्र के किस चरण में जातक का जन्म हुआ है, उसके आधार पर होता है। किन्तु उन चौबीस घंटों में बारह लग्नों की बारह कुंडलियां बनती है। कहने का तात्पर्य यह कि उन चौबीस घंटों में जन्में सभी जातकों की जन्म नक्षत्र और जन्म राशि तो समान होंगी किन्तु उन सभी की कुंडलियां अलग-अलग होगी किसी के लिये गुरु, सूर्य, चंद्रमा, मंगल कारक ग्रह होगें तो किसी के लिये शुक्र, शनि या बुध कोई मांगलिक होगा। किसी की कुंडली में राजयोग तो किसी की कुंडली में दरिद्र योग होगा। 
         कोई अल्पायु होगा, कोई मध्यायु होगा, तो कोई दीर्घायु तो किसी कुंडली में उसका वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा होगा तो किसी की कुंडली में बहुत खराब होगा। किसी के द्वि-विवाह, त्रि-विवाह योग होता है तो कोई अविवाहित रहता है। कहने का तात्पर्य यह है कि उन चौबीस घंटों में जन्में सभी जातकों को जन्म नक्षत्र तो एक ही होगा किन्तु सभी की कुंडलियां और उनका भाग्य अलग-अलग होगा। यहां पुन: ध्यान देने योग्य यह बात है कि गुण-मिलान सिर्फ जन्म नक्षत्रों के आधार पर ही होता है ऐसे में यदि किन्ही दो लड़के-लड़की के गुण मिलायेंगे और उनके गुण मिल भी गये किन्तु उनकी कुंडलियों में कोई दोष है तो वह विवाह कतई सफल नहीं हो सकता। 
           मेरे व्यक्तिगत ज्योतिषीय अनुभवों में मैंने सैकड़ों ऐसी कुंडलियां देखी हैं जिनके गुण तो 28-28, 30-30 मिल जाते हैं किन्तु उनका वैवाहिक जीवन अतियन्त कष्टप्रद है। उनके तलाक के मुकदमें चल रहे हैं या तलाक हो चुके हैं या उनका जीवन ही खत्म हो चुका है और सैकड़ों ऐसी कुंडलियां देखी गयी हैं। जिसके मात्र 8-8, 10-10 गुण ही मिलते हैं किन्तु फिर भी उनका पारिवारिक वैवाहिक जीवन सुखद उन्नतिपूर्ण चल रहा है। अत: यहां मैं पुन: लिखना और कहना चाहुंगा कि मैं गुण मिलान के खिलाफ नहीं हूं गुण मिलान भी आवश्यक है किन्तु मेरा पाठकों से सिर्फ यह निवेदन है कि मात्र गुण मिलान पर ही पूर्ण भरोसा नहीं करें किसी योग्य ज्योतिषी से बालक-बालिका की कुंडलियां मिलवाकर ही उसके विवाह का निर्णय लें क्योंकि गुण-मिलान से ज्यादा आवश्यक है कुंडलियों का मिलना और दोनों की कुंडलियों में उनके वैवाहिक जीवन की स्थिति। 
पण्डित"विशाल" दयानन्द शास्त्री ।
सम्पर्क 09669290067।
Edited by: Editor

आपके विचार

हिंदी में यहाँ लिखे
Ads By Google info

वास्तु

हस्त रेखा

ज्योतिष

फिटनेस मंत्र

चालीसा / स्त्रोत

तंत्र मंत्र

निदान


ऐसा भी होता है?

धार्मिक स्थल

 
Editor In Chief : Dr. Umesh Sharma
Copyright © Asha News . For reprint rights: ASHA Group
My Ping in TotalPing.com www.hamarivani.com रफ़्तार www.blogvarta.com BlogSetu