Ads By Google info

ताजा खबरें
Loading...
विज्ञापन

अनमोल विचार

Subscribe Email

ताजा लेख आपके ईमेल पर



पसंदीदा लेख

गुप्त नवरात्री 17 जुलाई 2015 से 25 जुलाई 2015 तक

print this page
       इस वर्ष गुप्त नवरात्री आषाढ़ मास की प्रतिपदा 17 जुलाई यानि की कल से शुरू होकर 25 जुलाई नवमी तक मान्य होगा । हिन्दू धर्म में नवरात्र मां दुर्गा की साधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्र के दौरान साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां भगवती की विशेष पूजा करते हैं। तंत्र साधना आदि के लिए गुप्त नवरात्र बेहद विशेष माने जाते हैं। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इस नवरात्रि के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है।

gupt-navratri-2015-गुप्त नवरात्री 17 जुलाई 2015  से 25 जुलाई 2015 तक


 गुप्त नवरात्र पूजा विधि- 
गुप्त नवरात्र के दौरान अन्य नवरात्रों की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन करना चाहिए। 

 जानिए गुप्त नवरात्रि का महत्त्व--- 
 देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं। इस नवरात्री की समाप्ति के साथ ही चातुर्मास प्रारंभ हो जाते हैं ,देवशयनी एकादसी से देवउठनी (देवप्रबोधनी )एकादसी के बीच चार माह को ऋषि परंपरा में विशेष महत्त्व प्राप्त है ! ‘नव शक्ति समायुक्तां नवरात्रं तदुच्यते’। नौ शक्तियों से युक्त नवरात्रि कहलाते हैं। देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में चार माह नवरात्र के लिए निश्चित हैं- 
उक्तं – ‘आश्विने वा ऽथवा माघे चैत्रें वा श्रावणेऽति वा।’ अर्थात आश्विन मास में शारदीय नवरात्रि तथा चैत्र में वासंतिक नवरात्रि होते हैं। माघ व श्रावण के गुप्त नवरात्रि कहलाते हैं वहीं शारदीय नवरात्रि में देवी शक्ति की पूजा व बासंतिक नवरात्रि में विष्णु पूजा की प्रधानता रहती है…। 
 प्रतिदिन नौ दिनों तक यम, नियम, संयम व श्रद्धा से मार्कण्डेय पुराण अंतर्गत दुर्गा सप्तशती का पाठ भक्तगण करते हैं।
 ‘नमो दैव्ये महादैव्ये, शिवायै सततं नमः।
 नमः प्रकृत्यै भद्रायै, नियता: प्रणताः स्मताम्‌’॥ 

 गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां-- 
 गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।
 – गुप्त नवरात्रि में सुबह या विशेष रूप से रात्रि में दिन के मुताबिक देवी के अलग-अलग स्वरूपों का ध्यान कर सामान्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
 —पूजा में लाल गंध, लाल फूल, लाल वस्त्र, आभूषण, लाल चुनरी चढ़ाकर फल या चना-गुड़ का भोग लगाएं। धूप व दीप जलाकर माता के नीचे लिखे मंत्र का नौ ही दिन कम से कम एक माला यानी 108 बार जप करना बहुत ही मंगलकारी होता है 
– सर्व मंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
 शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोस्तुते।।
Edited by: Editor

2 comments

July 19, 2015 at 3:58 PM

बहुत बढ़िया जानकारी!

 
{[[''],['']]}
October 5, 2016 at 4:33 PM

navraati ke gupt raaj btaaye

 
{[[''],['']]}

आपके विचार

हिंदी में यहाँ लिखे
Ads By Google info

वास्तु

हस्त रेखा

ज्योतिष

फिटनेस मंत्र

चालीसा / स्त्रोत

तंत्र मंत्र

निदान


ऐसा भी होता है?

धार्मिक स्थल

 
Editor In Chief : Dr. Umesh Sharma
Copyright © Asha News . For reprint rights: ASHA Group
My Ping in TotalPing.com www.hamarivani.com रफ़्तार www.blogvarta.com BlogSetu