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जानिए दीपावाली 2015 के शुभ मुहूर्त, ऐसे करें दीपावली पूजन

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Learn-Deepawali-2015-auspicious-the-Diwali-Puja-such-जानिए दीपावाली 2015 के शुभ मुहूर्त,  ऐसे करें दीपावली पूजन       हमारे देश भारत में दीवाली जिसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, साल का सबसे प्रसिद्ध त्योहार है। दीवाली उत्सव धनतेरस से शुरू होता है और भैया दूज पर समाप्त होता है। अधिकतर प्रान्तों में दीवाली की अवधि पाँच दिनों की होती है जबकि महाराष्ट्र में दीवाली उत्सव एक दिन पहले गोवत्स द्वादशी के दिन शुरू हो जाता है। भारत में मनाए जाने वाले पर्व और त्यौहार मात्र उत्सव नहीं होते जिन्हें उल्लास और उमंग के साथ मनाकर एक औपचारिकता पूरी कर दी जाती है बल्कि अधिकांश पर्वों में एक संस्कृति, इतिहास और परंपरा निहित है. ऐसा ही एक पर्व है दीपावली, जिसे पूरे देश में धर्म और जाति की बंदिशे तोड़कर हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.
 दीवाली पर की जाती हैं इन देवता की पूजा---- 
 दीपावली के दिन लक्ष्मी, गणेश और सरस्वती की पूजा करने का विधान है. इस दिन गणेश जी की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि गणेश की अराधना के बिना कोई भी पूजन अधूरा होता है, लक्ष्मी जी धन की देवी है. धन व सिद्धि के साथ ज्ञान भी पूजनीय है और ज्ञान की पूजा के लिए मां सरस्वती की पूजा की जाती है. इसलिए अगर एक ही फोटो में तीनों देवता हों तो अच्छा रहेगा. कहा जाता है कि कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान राम अपनी पत्नी सीता के साथ चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे. इसलिए आज के दिन भगवान राम और माता सीता की भी पूजा की जाती है. दीपावली के दिन धन के देवता कुबेर, इंद्र देव तथा समस्त मनोरथों को पूरा करने वाले विष्णु भगवान की भी पूजा की जाती है. 
 क्या करें दीपावली के दिन-- 
दीपावली के दिनों में ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाना चाहिए। जो लोग इस दिन सूर्योदय के बाद तक सोते रहते हैं उन्हें महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं होती है। विशेष रूप से दीपावली के दिन दिन जल्दी उठने का प्रयास करें। सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए। कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर दिन में या शाम के समय सोना नहीं चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बीमार है, वृद्ध है या कोई स्त्री गर्भवती है तो वह दिन में या शाम को सो सकती हैं। लेकिन स्वस्थ व्यक्ति को ऐसे समय में सोना नहीं चाहिए। 
         शास्त्रों के अनुसार जो लोग ऐसे समय में सोते हैं वे निर्धन बने रहते हैं।कार्तिक अमावस्या की रात्रि को सभी बाधाओं से मुक्ति की रात्रि माना गया है। इस खास दिन किसी भी प्रकार के पति-पत्नी के बीच झगड़े, गृह कलह, शत्रु, भूत आदि बाधाएं दूर कर जीवन में उत्सव का उजाला फैलाया जा सकता है। इस महत्वपूर्ण दिन धन के अभाव को हमेशा-हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है। दीपावली के दिन क्रोध और जोर चिल्लाना भी अशुभ रहता है। जो लोग इस दिन क्रोध करते हैं या जोर से चिल्लाते हैं उन्हें लक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है। 
           विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखें कि घर में किसी भी प्रकार का कलह या झगड़ा नहीं होना चाहिए। घर-परिवार के सभी सदस्य आपस में प्रेम से रहें और खुशी का माहौल बनाकर रखें। जिन घरों में झगड़ा या कलह होता है वहां देवी की कृपा नहीं होती है। दीपावली के दिन घर में गंदगी नहीं होना चाहिए। घर का कोना-कोना एकदम साफ एवं स्वच्छ होना चाहिए। किसी भी प्रकार की बदबू घर में या घर के आसपास भी नहीं होना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किसी भी प्रकार का नशा भी वर्जित है। नशा वैसे भी स्वास्थ्य के हानिकारक ही है। जो लोग दीपावली के दिन नशा करते हैं वे सदैव दरिद्र ही बने रहते हैं। शास्त्रों में नशे को अभिशाप के समान माना गया है। हमारे भारत देश में नवरात्रों के बाद दीपावली सहित कई महत्वपूर्ण त्योहार आते हैं। इनमें पंच पर्व आरंभ होते हैं धनतेरस से भईया दूज तक। 
      इस क्रम में 09 नवम्बर 2015 को धन त्रयोदशी, यानि धनतेरस है। इस दिन को धन्वन्तरि जयन्ती भी कहते हैं। धनतेरस यानि धन्वन्तरि जयन्ती 09 नवम्बर को सोमवार के दिन मनाई जाएगी । समस्त हिन्दू जगत के लिए आज का दिन खुशियों से भरा हुआ होता है। चाहे कोई नौकरी पेशा हो या व्यापारी, गांव में रहे या शहर में, धनतेरस के दिन तक अपने घर की साफ सफाई और दीपावली पूजन की पूरी तैयारियां कर ली जाती हैं। मकान छोटा हो या बड़ा या दुकान-बाजार सभी जगह साज-सज्जा और जगमगाहट से भरपूर रहता है। व्यापारिक वर्ग के लिए भी दीपावली बहुत ही महत्वपूर्ण होती है।
      धनतेरस के दिन घर में नई चीज खासकर बर्तन और सोना चांदी खरीदकर लाने का पारम्परिक रीति-रिवाज है। इस दिन धन का अपव्यय नहीं किया जाता है। किसी को उधार या कर्ज भी नहीं दिया जाता है। इस दिन लोग व्यापार में भी लेन देन करने से बचते हैं। 10 नवम्बर 2015 (मंगलवार) को छोटी दीपावली यानि नरक चतुर्दशी है। इसको नरक हारिणी चतुर्दशी भी कहते हैं, यानि नरक से मुक्ति दिलाने वाली चतुर्दशी, जिसमें दीपदान का पर्व मुख्य हैं। इसके उपरान्त महालक्ष्मी, यानि मुख्य दीपावाली का पर्व कार्तिक अमावश्या 11 नवम्बर 2015 (बुधवार) को मनाया जाएगा, जिसे बड़ी दीपावली कहते हैं।
          इस वर्ष लक्ष्मी पूजा, दीवाली पूजा,केदार गौरी व्रत,चोपड़ा पूजा, शारदा पूजा, दीवाली स्नान, दीवाली देवपूजा की जाएगी.. दिनांक 12 नवम्बर 2015 (गुरुवार) को गोवर्धन पूजा एवं अन्न कूट पूजा है। इस दिन को द्यूतक्रीड़ा दिवस भी कहते हैं। महाभारत काल में भी पांडव और कौरवों के बीच में इसी दिन जुए का खेल हुआ था और पांडव इसमें कौरवों के छल कपट के आगे हार गए थे।कार्तिक प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट पर्व एवं गुजराती नया साल भी मनाया जाता हैं. 13 नवम्बर 2015 (शुक्रवार) को यम द्वितीया व्रत, यानि भाई दूज है। इसको भईया दूज भी कहते हैं। चाहे भाई कितना ही व्यस्त हो इस दिन आशीर्वाद लेने के लिए वह अपनी बहन के घर जाकर टीका लगवाता है। 
       इन सभी पांच त्योहारों में धनतेरस और महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। इन पाँच दिनों के दीवाली उत्सव में विभिन्न अनुष्ठानों का पालन किया जाता है और देवी लक्ष्मी के साथ-साथ कई अन्य देवी देवताओं की पूजा की जाती है। हालाँकि दीवाली पूजा के दौरान देवी लक्ष्मी सबसे महत्वपूर्ण देवी होती हैं। पाँच दिनों के दीवाली उत्सव में अमावस्या का दिन सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है और इसे लक्ष्मी पूजा, लक्ष्मी-गणेश पूजा और दीवाली पूजा के नाम से जाना जाता है। दीवाली पूजा केवल परिवारों में ही नहीं, बल्कि कार्यालयों में भी की जाती है। पारम्परिक हिन्दू व्यवसायियों के लिए दीवाली पूजा का दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दिन स्याही की बोतल, कलम और नये बही-खातों की पूजा की जाती है। दावात और लेखनी पर देवी महाकाली की पूजा कर दावात और लेखनी को पवित्र किया जाता है और नये बही-खातों पर देवी सरस्वती की पूजा कर बही-खातों को भी पवित्र किया जाता है। 
        दीवाली के दिन लक्ष्मी पूजा करने के लिए सबसे शुभ समय सूर्यास्त के बाद का होता है। सूर्यास्त के बाद के समय को प्रदोष कहा जाता है। प्रदोष के समय व्याप्त अमावस्या तिथि दीवाली पूजा के लिए विशेष महत्वपूर्ण होती है। अतः दीवाली पूजा का दिन अमावस्या और प्रदोष के इस योग पर ही निर्धारित किया जाता है। इसलिए प्रदोष काल का मुहूर्त लक्ष्मी पूजा के लिए सर्वश्रेस्ठ होता है और यदि यह मुहूर्त एक घटी के लिए भी उपलब्ध हो तो भी इसे पूजा के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए। 
 ऐसे करें दीपावली पूजन --- 
कहा जाता है कि लक्ष्मी वहीं वास करती है जहां सफाई और स्फूर्ति हो, इसीलिए दिन सुबह-सुबह जल्दी उठकर नहा लेना चाहिए और आलस्य का त्याग करना चाहिए. लक्ष्मी आलस्य करने वालों का साथ नहीं देती. लक्ष्मी जी के स्वागत की तैयारी में घर की सफाई करके दीवार को चूने अथवा गेरू से पोतकर लक्ष्मीजी का चित्र बनाएं. आप चाहे तो लक्ष्मी जी की तस्वीर भी लगा सकते हैं. लक्ष्मी जी के चित्र के सामने एक चौकी रखकर उस पर मौली बाँधें. अब चौकी पर छः चौमुखे व 26 छोटे दीपक रखें. इनमें तेल-बत्ती डालकर जलाएं. फिर जल, मौली, चावल, फल, गुढ़, अबीर, गुलाल, धूप आदि से विधिवत पूजन करें. पूजा पहले पुरुष तथा बाद में स्त्रियां करें. पूजा के बाद एक-एक दीपक घर के कोनों में जलाकर रखें. 
 एक छोटा तथा एक चौमुखा दीपक रखकर निम्न मंत्र से लक्ष्मीजी का पूजन करें:-- 
 नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरेः प्रिया. या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्वदर्चनात॥ 
 इस मंत्र से कुबेर का ध्यान करें:-- 
 धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च. भवंतु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादिसम्पदः॥ 
 जानिए इस दीवाली पर लक्ष्मी जी खुश करने के लिए क्या करें--- 
धन व लक्ष्मी की पूजा के रूप में लोग लक्ष्मी पूजा में नोटों की गड्डी व चांदी के सिक्के भी रखते हैं. इस दिन रंगोली सजा कर मां लक्ष्मी को खुश किया जाता है. लक्ष्मी जी को लाल रंग के कमल के फूल चढ़ाना विशेष रुप से शुभ फलदायी होता है. दीपावली के दिन दक्षिणावर्ती शंख का पूजन अत्यंत शुभ माना जाता है. शंख पूजन से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं. 
       इस दिन शंख पर अनामिका अंगुली से पीला चंदन लगाकर पीले पुष्प अर्पित करके और पीले रंग के नैवेद्य का ही भोग लगाना चाहिए. लक्ष्मी पूजा के लिए पूजन सामग्री--- लाल वस्त्र , फूल, 5 सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश हेतु आम का पल्लव, कलावा, रोली, सिंदूर, 1 नारियल, अक्षत, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत ( दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी , अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली. कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन. =======================================================================
आइये जाने कुछ विशेष योगों को-- 
 सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग शुभ मुहूर्तों में स्वर्ण आभूषण, कीमती वस्त्र आदि खरीदना, पहनना, वाहन खरीदना, यात्रा आरम्भ करना, मुकद्दमा दायर करना, ग्रह शान्त्यर्थ रत्न धारण करना, किसी परीक्षा प्रतियोगिता या नौकरी के लिए आवेदन-पत्र भरना आदि शुभ मुहूर्त जानने के किए अब आपको पूछने के लिए किसी ज्योतिषी के पास बार-बार जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी । 
     सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग वारों का विषेश नक्षत्रों से सम्पर्क होने से ये योग बनते हैं । जैसे कि इन योगों के नामों से स्पष्‍ट है, इन योगों के समय में कोई भी शु्भ कार्य आरम्भ किया जाय तो वह निर्विघ्न रूप से पूर्ण होगा ऐसा हमारे पूर्वाचार्यों ने कहा है । यात्रा, गृह प्रवेश, नूतन कार्यारम्भ आदि सभी कार्यों के लिए या अन्य किसी अपरिहार्य कारणवश यदि व्यतिपात, वैधृति, गुरु-शुक्रास्त, अधिक मास एवं वेध आदि का विचार सम्भव न हो तो सर्वार्थसिद्धि आदि योगों का आश्रय लेना चाहिये । 
 अमृतसिद्धि योग---- 
अमृतसिद्धि योग रवि को हस्त, सोम को मृगशिर, मंगल को अश्‍विनी, बुध को अनुराधा, गुरु को पुष्य नक्षत्र का सम्बन्ध होने पर रविपुष्यामृत-गुरुपुष्यामृत नामक योग बन जाता है जो कि अत्यन्‍त शुभ माना गया है । 
 रवियोग योग----- 
रवियोग भी इन्हीं योगों की भाँति सभी कार्यों के लिए हैं . शास्त्रों में कथन है कि जिस तरह हिमालय का हिम सूर्य के उगले पर गल जाता है और सैकड़ों हाथियों के समूहों को अकेला सिंह भगा देता है उसी तरह से रवियोग भी सभी अशुभ योगों को भगा देता है, अर्थात्‌ इस योग में सभी कार्य निर्विघन रूप से पूर्ण होंगे । 
 त्रिपुष्कर और द्विपुष्कर योग----- 
त्रिपुष्कर और द्विपुष्कर योग विषेश बहुमूल्य वस्तुओं की खरीददारी करने के लिए हैं . इन योगों में खरीदी गई वस्तु नाम अनुसार भविष्य में दिगुनी व तिगुनी हो जाती है । अतः इन योगों में बहुमूल्य वस्तु खरीदनी चाहिये । इन योगों के रहते कोई वस्तु बेचनी नहीं चाहिये क्योंकि भविष्य में वस्तु दुगुनी या तिगुनी बेचनी पड़ सकती है । धन या अन्य सम्पत्ति के संचय के लिए ये योग अद्वितीय माने गए हैं । इन योगों के रहते कोई वस्तु गुम हो जाये तो भविष्य में दुगुना या तिगुना नुकसान हो सकता है, अतः इस दिन सावधान रहना चाहिए । इस दिन मुकद्दमा दायर नहीं करना चाहिए और दवा भी नहीं खरीदनी चाहिए ।
 Thursday 12 November 2015 3:39PM - 11:59PM
 सर्वार्थसिद्धि योग--- 12-Nov-2015, 3:39 PM TO 13-Nov-2015, 6:46 AM 

 Friday 13 November 2015 12:00AM - 6:46AM
 सर्वार्थसिद्धि योग-- 12-Nov-2015, 3:39 PM TO 13-Nov-2015, 6:46 AM

 Sunday 15 November 2015 6:48AM - 7:35PM
 सिद्धि योग--- Venue: Delhi, India 15-Nov-2015, 6:48 AM TO 

15-Nov-2015, 7:35 PM 6:48AM - 7:35PM
 सर्वार्थसिद्धि योग--- 15-Nov-2015, 6:48 AM TO 15-Nov-2015, 7:35 PM 7:35PM - 11:59PM

 रवि योग--- 15-Nov-2015, 7:35 PM TO 16-Nov-2015, 8:05 PM
Edited by: Editor

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Editor In Chief : Dr. Umesh Sharma
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